देख दफ्तर में पड़े/विजयी भरत दीक्षित

🍁🌺🏵 बाबू 🏵🌺🍁

देख दफ्तर में पड़े तख़्त को
अधिकारी ने कुछ सख्त हो
अधीनस्थ कर्मचारी को
बुलाया और फरमान सुनाया
यह तख़्त यहां क्या कर रहा है?
चपरासी को बुलाइए और समझाइए
सरकारी संपत्ति की संभाल सिखाइए
इसे यहां से उठाइए
और मेरे घर पहुंचाइए

कर्मचारी कुछ सक पकाया
डरते डरते बोला
बनकर भोला
महोदय यह स्टॉक रजिस्टर में दर्ज है
बताना मेरा फर्ज़ है
अधिकारी झल्लाया
और फरमाया कुछ जुगत लगाइए
रजिस्टर न दिखाइए
यह देश की संपत्ति है व्यर्थ ना गवाइए
देश की संपत्ति अपनी होती है
यह बात हर किसी को समझाइए

पर इसे जल्दी मेरे घर पहुंचाइए
रजिस्टर में दर्ज है पर ले जाने में क्या हर्ज है
चाहे करो गुणा भाग या करो हेरफेर
पसंद नहीं है मुझे काम में देर
बाबू था लिखा पढ़ा और था कुछ कढ़ा
तख्त के आगे रजिस्टर में मात्रा आ की लगाई
तख्ता स्टॉक में रजिस्टर में आ गया
तख़्त साहब के यहां गया
ना कोई कटिंग न ओवरराईटिंग रजिस्टर में दर्शाई

बाबू ने स्वामिभक्ति भी साहब के प्रति पूरी दिखलाई
तख़्त गया तख़्ता आया
तख्ता देख बाबू भी ललचाया
घर में पत्नी ने था धमकाया
की रसोई घर का टूटा सेल्फ जल्दी ठीक नहीं कराया तो घर मत आना
कोई मत बनाना बहाना
बाबू ने चुपचाप यू-टर्न लगाया
तख्ता बन गया तख्ती
लगा दी ऊपर उल्टी कलछी
अब किसी की क्या हस्ती
कि बाबू को पकड़ पाए
और कोई इल्जाम लगाए
तख़्त गया तख़्ता गया तख़्ता की बन गई तख़्ती
“भरत”बाबू बाबू की कलम में बड़ी शक्ति ।।

रचना––-–—-
विजयी भरत दीक्षित
सुजानपुर टीहरा।
हिमाचल प्रदेश
96 25141 903

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *