पी रख्खी है/पंडित अनिल

🙏पी रख्खी है 🙏🙏

हाल मत पूछिये,हालात पी रख्खी है।
आँखें मत देखिये, अश्कात पी रख्खी है।।

आजमा ले वक़्त, जितना तिरा जी चाहे।
क्या चंद ग़म,मये क़ायनात पी रख्खी है।।

हौसला हारे मेरा,मंजूर ही नहीं मुझको।
मंजर-ए-आम की,सवालात पी रख्खी है।।

बहुतों को मय्यसर कहाँ, ग़म भी जमाने में।
हमने जमाने की,हर बात पी रख्खी है।।

क्या मयख़्वार होगा,कोई मुझसा अनिल।
ग़मख़्वार हूँ सारी, जज्बात पी रख्खी है।।

पंडित अनिल

नारी नारायणी 💐🙏

सृजनमय जिसका है जीवन ।
इस धरा की हँसती उपवन ।।
शत कोटि वंदन शत नमन ।
नारी तेरे बिन जग अकिंचन ।

धैर्य की अनुपम छटा तुम ।
आसमां घनकी घटा तुम ।।
उपमायें सारी लगे है जूठन ।
नारी . . . . . .

ब्यर्थ तुम बिन सृष्टि की काया ।
नादाँ जमाना समझ ना पाया ।।
सुकोमल सा तुम्हारा अन्तर्मन ।
नारी . . . . . .

तुम्हीं देवों की आँचल छाँव ।
स्वर्णिम स्वर्ग बसता पाँव ।।
जीवन धन है जीवन धन ।
नारी . . . .

पंडित अनिल

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