जीने की तमन्ना/पंडित अनिल

जीने की तमन्ना

कच्ची दीवारें भी कभी रेत में बनाया करिये।
हर घड़ी दुख के पहाड़े नहीं पढ़ाया करिये।।

सुर्ख रुख़सार है,नूर है महज धोखा।
फ़कत इसी के रंगत पर न जाया करिये।।

दुनिया दोरंगी माहिर है दग़ा करने में।
दिल मिले न मिले, हाथ मिलाया करिये।।

ग़मजदा करके ,हँसेंगे ग़म देने वाले।
दास्ताँ दर्द-ए-दिल की,न सुनाया करिये।।

बेरुखी दिल में, रखती है फ़रेबी दुनिया।
दिल सरेआम,तमाशा न बनाया करिये।।

सिर उठाकर जीने की,तमन्ना रखिये।
हर हाल में अनिल मुस्कुराया करिये।।

पं अनिल

मौलिक,स्वरचित,अप्रकाशित

अहमदनगर महाराष्ट्र

8968361211

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