पुलिस देश के/राम भगत नेगी

पुलिस देश के ….

सुबह शाम रात दिन 24 घंटे
हाथों में लिये कानून के डंडे

तेज निगाहें चतुर चाल
किया है रात दिन गाँव शहर को खुशहाल

भारत के रक्षक वीर पुलिस जवान
कोई न टीका है इनसे कानून का शेतान

चलती फ़िरती है इनकी जिंदगी
ना मुहब्बत न प्यार सदा सादगी

रोज़ रहते है ये कानून की वर्दी में
बरसात हो या सर्दी में

जितना भी जुल्म हो जनता पर
जुल्म इनसे कोसों दुर ही रहता

भुले भटके कही आप भी कानून में पड़े
लग जायें आपको डंडे खड़े खड़े

कानून के ये रखवाले है
हमारे देश के शान ये पुलिस वाले है

तपती धूप और आँधी तूफानों से रोज़ सामना
दिवाली दशहरा कभी ठीक से नहीं मनाया

राम भगत शत शत नमन करता है
देश के वीर पुलिस का सम्मान करता है

तुम जीओ हजारों साल
कानून का न हो रिश्वत से बेहाल बेहाल

राम भगत

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