आओ चलो मनाएं होली


आओ चलो मनाएं हम सब,
रंगों का त्योहार यह होली।
आपस में सब रंग उंडेलें,
और करें सब खूब ठिठोली।
घर के भीतर रहे न कोई,
बूढ़े – बच्चे – जवान सब बाहर आएं।
रंग गुलाल ले दौड़ें घर घर सबके,
प्रेम राग रंग सबके दिल में भर दें।
अब नहीं मनाएंगे तो मनाएंगे कब?
यह तो रंगों का त्योहार है होली।
भाईचारे का त्योहार है होली,
संदेश है समता का यह देता त्योहार यह होली।
भारत वर्ष का प्यारा त्योहार यह होली,
परिमल खुशियां हर सू बिखेरे,
भारत का यह न्यारा त्योहार है होली।

नंदकिशोर परिमल, से. नि. प्रधानाचार्य
सत्कीर्ति निकेतन, गुलेर (कांगड़ा) हि. प्र
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