होली आई,
रंगों की बौछार लाई,
नफरत की दीवारें मिटायी,
प्रेम की बहार लाई।

गली गली युवाओं की टोली चली,
रंग बिरंगे रंग उडे़लती चली,
प्रेम रंग लगाते चली,
नफरत की दीवारें तोड़ती चली।

बच्चों की बात न्यारी,
बाल कृष्ण सी तरकीबें सारी,
दूर से ही लगाएं ,
रंग बिरंगी पिचकारी।

होली ,
प्रेम संदेश देकर चली ,
यह बात हम पे छोड़ चली,
हर दिन होली समझ,
सारी नफरतें तोड़,
प्रेम से नाता जोड़।

वीपी ठाकुर,
कुल्लू