धावत नंद किशोर

रंग लिये धावत नंदकिशोर,
कुंज गलिन में धूम मचावत
करत ग्वाल संग शोर ,
रंग लिये धावत ……..

खेलत फाग राग धुनि छेड़त,
डारत पिचकारिन रस घोर ।
भींजत ब्रजवासी नर नारी ,
भींजत पट चुन कोर,
रंग लिये………..

राधा निरखत नंद नंदन को,
चितवत हैं चहुँओर ।
कृष्ण कन्हाई सरब सलोने,
चंचल अति चित्तचोर।।
रंग………

देखि छटा नैन सुख पावत,
ऊठत हियरे हिलोर,
अनिल राधिका रंगे श्याम रंग,
ऐसो कियो बरजोर।।
रंग लिये…….

पं अनिल

स्वरचित अप्रकाशित
पुणे महाराष्ट्र
8968361211