हिंदी शायरी/अजय

*

सबूत हर इक बात का, देना पड़ रहा है…*
*भरोसा वाक़ई, बुरे दौर से गुज़र रहा है.!!!*

दौर बुरा ही सही पर भरोसा अभी भी जीत रहा है,
बिन भरोसे के इंसान हमेशा धोखा खा रहा है….

नाता टूटा कुछ यूं इसकदर
मुड़कर ना जुड़ा फिर उम्रभर। (धोखा )

दिल टूटा कुछ यूं इसकदर
अब जुड़ ना पायेगा उम्रभर

ना दिल में आई, ना दिमाग में आई
ये दुनिया समझ में ही नहीं आई

रुला दिया/पंडित अनिल

पहले बहलाया/सुदेश दीक्षित

गद्दारों को जल्दी जल्दी ढ़ेर करो/नंद किशोर परिमल

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