रुला दिया/पंडित अनिल

रुला दिया

ख़ामोशियों ने रुला दिया ।
ख़ुदा ये कैसी सजा दिया ।।

वो शोर लगता सितार था ।
अब जैसे यतीम बना दिया ।।

तनहा उमर कटती नहीं ।
किस बात का बदला लिया ।।

ग़ुमसुम से अब रहने लगे ।
अब मुस्कुराना भुला दिया ।।

चुप सी घर की दीवार है ।
उदास घर का लगे दिया ।।

हम जितने उनके क़रीब थे ।
उतने अदब से भुला दिया ।।
पं अनिल

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