सीने में तकलीफ तब होती है’ /सुशील भारती

सीने में तकलीफ तब होती है’
रचनाकार– सुशील भारती

जब कोई झूठ के आँचल में चेहरा छिपाता है,
जब कोई शख्स धूप में आँसू सुखाता है।
दर्द- ए- गम झेलते- झेलते जब सुबह होती है,
सीने में तकलीफ तब होती है।

कच्ची कलियों को जब कोई तोड़ जाता है,
कोमल जिस्म को जब हैवान कोई निचोड़ जाता है।
सिसक- सिसक कर जब किसी की आँखें रोती है,
सीने में तकलीफ तब होती है।

पिंजरे में कैद परिन्दा जब पंख फड़फड़ाता है,
जब कोई मुफलिसी का मज़ाक उड़ाता है।
जब हस्ती कोई नेक दिलों में नफरती बीज बोती है,
सीने में तकलीफ तब होती है।

घाव देता है गहरा जब अपना कोई,
तोड़ता है दिल जब सपना कोई।
अपना मतलब निकाल जब दुनिया सोती है,
सीने में तकलीफ तब होती है।

जिस्म जब माटी में मिल जाते है,
हमेशा के लिए जब अपने दूरियाँ बनाते हैं।
विरह वेदना अपनों की जब रूह ढोती है,
‘भारती’ सीने में तकलीफ तब होती है।

रचनाकार– सुशील भारती, नित्थर, कुल्लू
मो. 9816870016

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