तुम लौट आओ/राम भगत नेगी

मौसम को बदलते देखा ..

मौसम को बदलते तो देखा
उसकी वफादारी को भी बदलते हुवे देखा
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हर शख़्स अपने लिये जीते है
आज उसको भी बेवफाई में जीते देखा
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बदलाव संसार का नियम है
पर वो ऐसे बदलेंगे सोचा ना था
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एक वो दिन
जहां हर पल रिश्तों की दुहाई
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एक आज का दिन
रिश्तों का डोर भी उससे ना सम्भले
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संयम ना हो भाषा पे अगर
तो रिश्ते गलतफमियों में भी टूटतते है
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सोच ना था उसकी बेवफाई
इस कदर रुलाइयेगी
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और हर पल मुझे
उसकी याद स्तायेगी
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मैंने मौसम को बदलते देखा,
नदी को दरिया बनते देखा
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बादल को बरसते देखा
बिजली को कड़कते हुवे भी देखा
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पर आज दिल को
रोते रोते सम्भलते हुवे भी देखा
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राम भगत किन्नौर
9816832143

तुम लौट आओ ..

सर्द मौसम में
सर्द हवाओं में

तुम कहा चले गये
यूं अकेला छोड़ गये

तेरी यादों के साथ
मैरी यादें भी थी

सब ले कर चल दिये
हमें यूं तन्हा छोड़ दिये

बैठ कर तेरी तस्वीर
रोज बना लेता हूँ

अपने आप को गम
के नशे में डूबा लेता हूँ

तू छोड़ दे मुझे
तो ये जीवन किस काम की

तेरे बिना ये सांसें मैरे
अब किस काम की

तेरी तन्हाई के साथ
मैरी तन्हाई भी थी

सब ले कर चल दिये
हमें यूं तन्हा छोड़ दिये

मत ऊल्झाओ मैरे सपने को
तुम फिर से लौट आओ

राम भगत तेरे बिना
आज भी अधूरा है

तुम लौट आओ तुम लौट आओ

गुलाम देश


आज ये क्या हो रहा है
किसी को मालूम नहीं है
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बेरोज़गारी दिन प्रति दिन बढ़ रही है
वहीं जनसंख्या भी प्रति दिन बड़ती जा रही है
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भ्रष्टाचार ओर लूट मार है यहाँ
बलात्कार ओर हत्याएँ है यहाँ
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नशे में सब भाई चूर हो रहे है
सत्य पर चलने वाले ही आज झूठ का सहारा ले रहे है
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देश की संस्कृति बिगड़ती ही जा रही है
देश में आज नंगा नाच ही हो रहा है
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देश भकतों की खून से
हुआ ये आज़ाद देश
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भ्रष्टाचार,बेरोज़गारी,लूटमार जातिवाद की
ज़ंजीरों से गुलाम हुआ है
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क़ानून व्यवस्था को चलाने वाले
ही आज क़ानून के विक्रेता है
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अपने घर और अपने कुर्सी को बचाने वाले
आज के वे नेता है
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राम भगत नेगी

किन्नौर 9816832143

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