दिन यूं ही गुजरेंगे,
महीने ,साल, दशक बीतेंगे।
कभी वसंत की बहारें होगी,
तो कभी सावन की बरसातें होगी।
हर गुजरते पल के साथ,
चलती बदलती हसरतें होगी।
कभी राहों में फूलों की पंखुड़ियां होगी,
तो कभी कांटों पे चलना होगा।
कभी नम आंखें होगी,
तो कभी मुक्सकुराता चेहरा होगा।
अपने भी होंगे पराये भी होंगे,
दिल के हमदर्द भी होंगे मतलब के दिलासे भी होंगे।
गिरना भी होगा फिर उठना भी होगा,
बस कर्म पथ पर चलते रहना होगा!

वीपी ठाकुर,
जिला कुल्लू।