आम के पेड़ का अंतिम दृश्य/नंद किशोर परिमल

आम के पेड़ का अंतिम दृश्य )
गुलेरी बंधुओं के आंगन में, पिता जी ने आम था एक लगाया ।
आज उसके जीवन का अंतिम दिन कुछ यूं था आया ।
आम उसको लगते अनोखे, रंग अनूठा था उनका न जाने क्यों होता!
फल रसीले और मीठे अनोखे थे होते, स्वाद भी कुछ उनका अनोखा था होता ।
बंदरों से जो शेष बचते, माता जी संभाल उनको आले में रखतीं ।
एक एक सबको बांट कर थी देतीं, दूसरा किसी को नहीं वो थी देतीं ।
अंतिम समय आज उस पेड़ का था यूं आया ।
कवि ह्रदय मेरा रोया जी भर गया था ।
कैमरे में कैद हो गया पेड़ कटने से पूर्व कुछ ऐसे ।
कह रहा हो अपनी व्यथा मुझसे संकेतों में जैसे ।
गौर से इस सजीव चित्र को सभी आज देखो ।
चित्र पढ़ कर परिमल, प्रतिक्रिया अपनी मुझको भेजो ।
नंदकिशोर परिमल, गांव व डा, गुलेर
तह, देहरा जिला, कांगड़ा (हि_प्र )
पिन, 176033, संपर्क, 9418187358

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