सफर/पंडित अनिल

सफ़र ”

आँधियाँ भी तोहफ़े लाया करती हैं ।
जब भी घर हमारे आया करती हैं ।।

चाँद सूरज ज़िंदगी सब हैं सफ़र में।
सफ़र पूरी यूँ ही हो जाया करती हैं ।।

रंगो का जादू चढ़े सिर बोलता है ।
बहुत सब्जेबाग दिखाया करती है ।।

मेहनतकशी का तोड़ होता ही नहीं ।
हर समय ये रंगें जमाया करती है ।।

ताज़ तख़्त टिकते नहीं हैं उम्र भर ।
बाजियाँ ये पलट जाया करती हैं ।।

पं अनिल

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