लोहड़ी आई/नंद किशोर परिमल

लोहड़ी
सब कहते हैं लोहड़ी आई,
लोहड़ी आई नीं माए लोहड़ी आई।
आज मिलेगी मूंगफली रेबड़ी,
और मिलेगी रस मिलाई।
लोहड़ी आई नीं माए लोहड़ी आई।
मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर,
सूरज नें ली उत्तरायण में अंगड़ाई।
इस अवसर पर उसने चाल जो बदली,
समय के संग अपनी गति बढ़ाई।
लोहड़ी आई नीं माए लोहड़ी आई

सब लोहड़ी के गीत जो गाते,
मस्ती भरे हैं सब इतराते।
आज पराया न अपना जाने कोई।
घर आंगन में मिल-बैठ ,
आग जलाते, खुशी मनाते।
इक दूजे को आवाज लगाते,
आओ भाई, आओ भाई।
प्यार बांटते, पतंग उड़ाते,
सहज गा उठते सब – लोहड़ी आई नीं माए लोहड़ी आई।

मेल मिलाप की रीत है लोहड़ी,
नये विकास का गीत है लोहड़ी।
दुल्ले-भट्टी वाले की प्रीत है लोहड़ी,
जिसने बन में थी धी (लड़की) ब्याही।
लोहड़ी आई नीं माए लोहड़ी आई।
इक्ठे मिल बैठकर खिचड़ी खाते,
हंसते गाते खुशी मनाते।
परिमल सब ही इक रट लगाते,
लोहड़ी आई नीं माए लोहड़ी आई।

नंदकिशोर परिमल
गुलेर (कांगड़ा) हि_प्र
पिन 176033
संपर्क सूत्र_9418187358

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