ये मंच भी कितना/राम भगत नेगी

ये मंच……….

ये मंच भी कितना सुंदर है
कभी हसाता है कभी रुलाता है

आए है सब यहां
माँ बाप के आँचल से

पर आज सब
माँ बाप को भूल गये

आए यहां सब
पिता के लाड प्यार से

पर आज सब
वह लाड प्यार भूल गये

भाई बहन का प्यार यहां
समाज का हर सार यहां

खुला आसमा है यहां
खुला जम्मी का साया

देश एक मज़हब अनेक
भाषा एक बोली अनेक

फिर भी जात पात
की लड़ाई है आज

ये मंच भी कितना सुंदर है
कभी हसाता है कभी रुलाता है

राम भगत किन्नौर
9816832143

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