🌻खत कोई जबावी है वो🌻
ग़ज़ल

सुन्दर सीधी सादी है वो
प्यारी सी उन्मादी है वो

मन मंदिर में बसने वाली
सपनों की शहजादी है वो

सुन्दर सुन्दर बातें करती
खत कोई जवाबी है वोह

बागवां की लगती शोभा
खिली कली गुलावी है वो

एक कहूँ वो दस सुनाये
सच हाज़िर जवाबी है वो

लगती सहरा में मृगतृष्णा
वियावान स्वभावी है वो

अच्छों संग अच्छा करती
दुर्जन लई खरावी है वो

नज़र मिलाये दिल लूटे
लय कोई शरावी है वो

निराश लोग कुछ भी कहें
मेरी छंद कितावी है वो।

सुरेश भारद्वाज निराश
धौलाधार कलोनी लोअर बड़ोल पी ओ दाड़ी धर्मशाला हिप्र
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9418823654