नया साल है आया/पंडित अनिल

नया साल है आया ”

आते आते धीरे धीरे नया साल है आया ।
कूँकी कोयल कोकिल ने भी दीप राग है गाया ।।
उतरी धूप सुनहरी आँगन सूरज है मुस्काया ।
गेहूँ के खेतों में सरसों फ़ूले मन हरषाया।।

बीस सतारह बिता बीस अठारह नें ललचाया ।
ईस्वी सन् नें नव संवत्सर का पथ साफ़ कराया ।।
प्रकृति सुंदरी सजी दुल्हनिया नें आँचल लहराया ।
मकर गेह रबि जायेंगे अब पुत्र मिलन है भाया ।।

नन्हें नन्हें ओस कणों को दल दुर्बा ने झुलाया।
खिली मसूर ने निज कानों में बाली है लटकाया।।
जरा रसीले जरा गँठीले मटर नें शोर मचाया ।
लाल टमाटर नें डाली से आँखें लाल दिखाया।।

कहीं मोर नें पाँख पसारे मोहक रास रचाया ।
हंस पाँव में घुँघरू बाँधे शारद शीश नवाया।।
शरद ऋतु भाये पर कुछ की जर्जर भी है काया।
नया साल मंगल हो सबका देवा अनिल मनाया।।

पं अनिल

अहमदनगर महाराष्ट्र

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *