कैसे हो गये लोग

घर कन्या आई है ,
सुन माय़ुष होते क्युँ लोग,
कन्या आई लक्ष्मी आई,
यह सत्य भूले क्युँ लोग।।

कुछ माँगती भी नहीं वोह,
वे बजह डाँटते हैं क्युँ लोग,
नजर झुका कर चलती रही,
दरिंदे बन जाते हैे क्युँ लोग।।

क्या नहीं करती आज बेटियाँ,
विवेक हीन बने हैं क्युँ लोग,
थोड़े में ही कर लेती गुजारा,
मिटाने में लगे हैं क्युँ लोग।।

पढ़ गये वालिद कहते सब हैं,
संस्कारों पर चलते नहीं क्युँ लोग,
कन्या पूजन मन भाये जब खूव,
मारने पर तुले गली गली क्युँ लोग।।

देखा देखी है या विनाश मति,
अवलोकन करते नहीं क्युँ लोग,
मिट जायेगी मानव जात धरा से,
कन्या सुरक्षा करते नहीं क्युँ लोग।।