भारतीय सेना के विजय दिवस/पंडित अनिल

भारतीय सेना के विजय दिवस को नमन” “इस रचना के साथ”

ख़लल नहीं डाला है , ख़लल नहीं डालेंगे ।
मुल्क में ख़लल हमारे, तेरे घर घुसेंगे मसल डालेंगे।।

माँ भारती का करे मैला , आँचल कोई नापाक़।
चूर चूर करेंगे सर उसका, कुचल डालेंगे।।

विजय का सेहरा बाँधा है, बाधेंगे हरदम ।
रँण बाँकुरे विजय की , फ़िर फ़सल डालेंगे ।।

क्यूँ घोल रख्खी है , ख़ून में दग़ेबाजी तूँने ।
नस्लें कोसेंगीं तुझे, तेरा भूगोल बदल डालेंगे ।।

बहुत देखा अदब-ए-एहतराम,का मंज़र।
बाज़ आ भी जा,नहीं तो, निगल डालेंगे।।

पं अनिल

अहमदनगर महाराष्ट्र

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