साथ होना समस्त टीम का
पोषक गरीबी की जमीन का,
उगे फसल महके हर चेहरा,
पेट भरता रहे सदा दीन का ,
हड़प करते हक जो दीन का,
ख्याल करें कुछ तो जमीर का,
कब तक निवाला छीनते फिरोगे,
बिन नीर तड़पती वेबश मीन का,
साथ चलकर बाँटें खुशियाँ ऐसी,
जैसे दर्द हरता नुख्सा हकीम का,
उम्मीदें नहीं दिखती राजनायिकों से,
क्युँकि अधिकारी बन चुका टीन का,
पगार से भूख नहीं मिटती उनकी,
काम करता है नित वोह हीन का,
किसको क्या कहें मन करता है अब,
समा जाऊँ गर सीना फटे जमीन का।।