हरिद्वार में हर की पौड़ी
हरिद्वार में हर की पौड़ी,
जनता आए दौड़ी दौड़ी।
हर कोई गाता_हर मां गंगे,
हर कोई रटता, जय मां गंगे।

नर – नारी का मां भेद न करती,
सबके दुखों को मां गंगा हरती।
रोते रोते भक्त हैं आते,
हंसते गाते हैं बापिस जाते।
एक राग हैं सब ही गाते,
हर मां गंगे – जय मां गंगे।
ठंडक देती, ताप यह हरती,
जन्म-जन्मांतर के पाप मां हरती।
हरिद्वार की यह पावन धरती,
सबकी आस है पूर्ण करती।
सबके मुंह से यह ही निकले,
जय मां गंगे हर मां गंगे।

मां के दर पर जो भी आया,
खाली हाथ न उसे लौटाया।
जो कुछ जिसने इस से मांगा,
सब कुछ वह उसने मां से पाया।
नहीं किसी से यह कुछ लेती,
बदले में है सब कुछ देती।
परिमल का दिल यह ही करता,
धीरज धर कर रहूं यहीं मैं।
गाता रहूं मैं यह धीरे धीरे,
जय मां गंगे, हर मां गंगे।।

नंदकिशोर परिमल
गुलेर (कांगड़ा) हि_प्र
पिन 176033
संपर्क सूत्र – 941818735

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