सारथी/आवेग जायसवाल

सारथी
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वक्त जब बेमुरौव्वत होने लगे
उम्र पर हावी ढालान होने लगे
तलाश तब होतीं है उस साथी की
जो मुझमें बीज बलवान बोने लगे।।

बीज जो वर्षो पहले मैने डाले थे
हर दर्द हर तकलीफों से पाले थे
जो लहलहाये है बन आज किलकारी
अब आए और मुझमें ऊर्जावान होने लगे।।

खुद हो खड़ा मेरी छड़ी की जगह
बने आँखे वो मेरी चश्मे की जगह
हर जरूरत पर रहे ममता की तरह
जिसे देख हर उम्र भी हैरान रोने लगे।।

अपने हाथों का देकर सहारा मुझे
ले चले पार दुनिया से फिर बहुत दूर
जहाँ वक्त जाता है अब ठहर हर तरफ
ऐसी मेरी वो आखिरी उड़ान ढोने लगे।।

आवेग जायसवाल
958 मुट्ठीगंज इलाहाबाद

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