ए मुसाफिर/बी पी ठाकुर

ए मुसाफिर…..
बीते कल को याद न कर,
अगले कल की बात न कर,
उदास रहकर वक्त जाया न कर,
उदासी में भी मुस्कुराया कर,
जिंदगी को यूं रुलाया न कर,
उदास चेहरों को भी हंसाया कर।

ए मुसाफिर….
मत बैठ यूं उदास गमों से हारकर,
जिंदगी का सफर है न आयेगा फिर,
एक दिन आयेगी मौत,
जिंदगी की हमसफर बन कर,
चले जाएगी कफन में लिपटकर,
बिखर जाएगी हवा में राख बनकर।

ए मुसाफिर…..!

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