” मेरे शहर के लोग ”

खिलखिलाये रहते हैं, मेरे शहर के लोग।
चल बता दे कैसे हैं तेरे शहर के लोग।।

परियाँ उजालों की यहाँ, रोशन करे हैं घर।
कैसे करे हैं रोशनी, तेरे शहर के लोग।।

गंगा यमुन की धारा,शीतल करे धरा।
क्या देखें हैं ये अमृत, तेरे शहर के लोग।।

सुकून है,अमन है,ये भारत है मेरे भाई।
रहते हैं क्या सुकू में, तेरे शहर के लोग।

झरने भी पत्थरों से,टकरायें गायें गीत।
बहलाते दिल हैं कैसे, तेरे शहर के लोग।।

पं अनिल

अहमदनगर महाराष्ट्र