परेशानियाँ बहुत हैं/पंडित अनिल

दिल

परेशानियाँ बहुत हैं , फ़िर भी मुस्कुराता है ।
दिल का बहुत एहसान है , सब सहे जाता है ।।

शिकायत ; तौबा तौबा , नरमियत है रखता ।
अश्क़ उतरनें से पहले ही , पी जाता है।।

दुनिया के रंजिशों से , नहीं वास्ता इसका ।
तन चूर होता है , पर , ये चले जाता है।।

अजी माली को मिले सुगंध , ये जरूरी नहीं ।
बाग़वाँ बाग के अपनें , फल कहाँ पाता है ।।

आशियाँ बनाने में , यूँ गुज़र जाती है उमर ।
हस्ती मिट जाती है , कौन समझ पाता है ।।

एक पल में नाल , कटती है , केवल, केवल ।
रिश्ता ग़हरा है , इससे नहीं मिट जाता है ।।

सब कहते हैं , बड़े नासमझ , हो अनिल।
बूढों को , महल नहीं , झोपड़ी सजाता है।।

पं अनिल

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