मेरे अपनों ने मेरे सपनों/हेमन्त पांडेय

मेरे अपनों ने मेरे सपनों की बोली लगायी
रूप था रंग था गुण भी थे मुझमें ,
पर बेटी के शब्द ने ही मेरी हत्या करायी |

माँ – पापा खुश थे प्रेग्नेंसी की खबर सुनकर ,
किन्तु सोनोग्राफी की खबर ने उनकी हमसे नाराजगी जतायी |

फिर क्या था यह सुनकर मेरी पहली रात बीती माँ के पेट में
और सुबह ही डॉक्टर से मेरी हॉस्पिटल में पहली मुलाकात करायी |

खामोसी तब छाई मेरे चेहरे पर जब मेरी माँ ने भी मेरे गर्भपात पर अपनी ख़ुशियाँ जतायी |
मौत तक का सफर मैं अकेली ही तय करती रही ,
अपनी माँ को गुनाहगार और डॉक्टर को कसाई कहती रही|

मेरे प्राण छूटे कुछ घड़ी में और मैं हर लड़की की दुर्दशा
को सोचती रही |
कैसे आयेगी कोई दुर्गा इस जमीं पर ,
जब माँ पूतना और कंस डॉक्टर बैठा होगा गली पर |

इक संदेश दे रही हूँ इस जहाँ से जाते जाते
बेटी आज है बेटी कल है तुम्हारा , बेटियों से धरा को सजाना |
कल्याण होगा पूरे विश्व का बस हर बेटी को भ्रूण हत्या के पाप से बचाना |

कवि – हेमन्त पाण्डेय ( अमेठी )
9082747967

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