दूसरों का छीन कर खाते हैं लोग/उत्तम सूर्यावंशी

दूसरों का छीन…

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दूसरों का छीन कर खाते हैं लोग

अपनी भूख मिटाते हैं लोग ।

दूसरों का घर उजाड़ते हैं लोग

अपना घर बसाते हैं लोग ।

दूसरों के बच्चे रूलाते हैं लोग 

अपने बच्चे हँसाते हैं लोग ।

दूसरों को दोषी बताते हैं लोग 

ख़ुद के दोष छुपाते हैं लोग ।

फँसा दूसरों को 

जश्न मनाते हैं लोग ।

अपनी ख़ुशियों की ख़ातिर 

क्यूँ दूसरों को दुख पहुँचाते है लोग ।

सब तो इन्सान हैं 

ये बात क्यूँ नहीं समझ पाते हैं लोग ।
उत्तम सूर्यावंशी किहार चंबा

मो.न..8629082280

Email.suryavanshi260@gmail.com

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