पार पर्वतों के/आवेग जायसवाल

पार पर्वतों के
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वादियाँ बुलाती हैं
जख्मो को सुलाती है
ठंडी हवा के झोंके से
आपको सहलाती हैं।।

इन वादियों से समझे
ये इशारा है बुलंदी के
जो गगन चूमती पर्वतो के
लिए रास्ता बताती हैं।।

उठो साहस के साथ
कदम बढ़ाओ धैर्य से
और देखो फिर कैसे
खुशियाँ पास आती है।।

चलो करें महसूस
इन वादियों को यूँ
जो सीने में प्रेम का
ये सैलाब लाती है।।

वादियाँ हमें बुलाती है
वादियाँ हमें बुलाती है।।
आवेग जायसवाल
958 मुट्ठीगंज इलाहाबाद

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