देखूं किसी औरों को तो/राम भगत नेगी

अहसास…….

देखूं किसी औरों को तो
तुम्हारी ही तस्वीर नज़र आती है

बातें करूँ किसी से भी
तुम्हारी ही बातें याद आती है

ये अहसास प्यार का ही है
या अहसास आपके डर का

जब से मुलाकत हुई है तुमसे
ये दिल काबू नही होता अब हमसे

ये आँखे और ये पलकें पत्थर से हो गये है
रोने पर भी आँसू आना छोड़ गये है

दिल जो धड़कता है तुम्हारी यादों में
अब तक बेजान ही खड़ा है

सिर्फ सांसे ही हो जो
मेरे शरीर को चला रही है

आज जो देखा आपको करीब से
एक उमंग और जोश आया है

ये आह्सास है प्यार का
आपके साथ जो बिताया उस पल का

जो जिंदा हूँ फिर से नही उमंग क साथ
ये अहसास ना टूटे ये साथ ना छूटे
राम भगत.

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