हे गलयाँ हुण नी रियाँ/जग्गू नोरिया

हे गलयाँ हुण नी रियाँ
नाल खोल खरैतडीं दिखा
अज हण मुक्की गियाँ

जाँदे नी मुण्डु चराने
भेडाँ छैलू बकरियाँ
पढ़ने लगे जाणे स्कुले
विरखे ए हण हुण भूल्ले

रश्ते लोकाँ भी रोकी दित्ते
बिठाण कुदियाँ पटियाँ
होये बख पट्टु हुईयाँ पटियाँ

इतने बड़े धन नी रे
मँहगाई चढ़ी गई घासे
खर्च कौन कियाँ सै
जमाना भी दुष्ट होएया
जानी हथेलिया कुण चले

हुण ताँ बोलदे सारे
गद्दी मित्र कियाँ हेरना
जंगलाता गार्ड शराबी
पैहरू कियाँ खदेड़ना

यह सब विरखे लगे मुकना
ताँई ताँ पिण्डे भी लगे दुखना
जुटे नी रे चमड़े दे मोटे गटठी
पैराँ लगे कण्ड़े चुभना

टोलियाँ टोलियाँ धना लिये
मित्र गद्दी थे चलदे
खेताँ मिंगना कणे थे भरदे

बडे डाल ओईया दे
खड़े चढी डुंगदे थे
लकडु पुरे स्याले फुकदे थे

सबकुछ गलाँ गये जमाने दियाँ
गद्दी मित्र मिलने कुत्थ कियाँ
सोची सोची “जग्गू ” भालदा
कुत्थी दूर कोई मित्र सिटियाँ मारदा.।।

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