ए चाँद तेरी खूबसूरती बला की लगती है
पर चाँदनी के बिना ये अधूरी लगती है
माना तू शीतल है, शांत है
पर तेरी गरिमा चाँदनी से होती है
माना तुझ पर सारी दुनिया मोहित होती है
पर तेरी सुषमा चांदनी से होती है
चाँदनी के बिना चाँद अधूरा होता है
चाँदनी के साथ से चाँद पूरा होता है
पूर्णिमा की रात में
चाँदनी चाँद के साथ में
पूरे जोश में होती है
अमबस्या पर भी
चाँद का अस्तित्व बचाने की
उसकी कोशिश पूरी होती है
जैसे चाँदनी अपने चाँद का पग पग साथ निभाती है
वैसे ही हर स्त्री अपने जीवनसाथी का साथ निभाती है
क्रोध,अहं टकराव की स्थिति बनाते हैं
दो ह्रदयो के बीच मे दूरियां बनाते हैं
क्यों नही समझ पाते आज के नर नारि
प्रेम विश्वास और साथ से ही
चलती है जीवन के गाड़ी