सितम गैरो ने ही ढाया नही है
तरस अपनो ने भी खाया नही है

बहारें आई तो दिल के चमन पर
मगर वो रंग अब आया नही है

गिला अब में करूँ तो क्या करूँ में
किसी ने दिल को भरमाया नही है

महकती ही रही खुशबू मगर वो
गुलो में रंग पहले सा नही है

बसी है दिल मे मूरत आज भी वो
मगर अब साथ वो साया नही है

लबो पे आज भी मेरे दुआ है
खुशी का राज वो जाना नही है
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
13/6/2017
आई – 11 पंचशील नगर
नर्मदा रोड़ ( जबलपुर म,प्र, )