गुजरात के चुनाव पर/नंद किशोर परिमल

गुजरात के चुनाव पर)
गुजरात का वोटर अबकी बार जाग गया है।
नेताओं का डर अब उसके मन से भाग गया है।
कोई भी दल इस बार उस को ठग नहीं सकेगा।
चुनाव में इस बार तो वह अपने मन की बात करेगा।
बडे़ बड़े नेताओं की दाव पर साख लगी है।
सभी को अपनी अपनी जीत की आस जगी है।
कोई न जान सके मोहर लगेगी क्या हाथ पर जाकर।
या धरती अंदर से खिलेगा कमल का फूल बाहर आकर।
अपना अपना जोर सभी दल दिन रात लगाएं।
अपने अपने हक में सारे जोर निरंतर आजमाएं।
अब की बार गुजरात में चुनाव लड़ना आसान नहीं है।
केंद्र की चूलें भी हिल गईं बच्चों का यह खेल नहीं है।
घमासान यह गुजरात का इस बार कठिन बड़ा है।
लंगड़ी किस को कौन लगा जाए कहना आसान नहीं है।
मतदाता अच्छे बुरे में अब अंतर पहचान रहे हैं।
झूठे सच्चे और लारे लप्पे देने वालों को जान रहे हैं।
जोर जो चाहे जितना लगा ले गुजरात में जाकर।
वोटर तो खामोश है देखे जलसे जलूस में आकर।
भेद न खोले वोटर कभी बात न बताए अपने मन की।
ठान है रखी उसने अबके अपने ही मन के करने
की।
क्यों अमूल्य समय ये अपना नेता सब व्यर्थ गंवाएं।
बारम्बार क्यों जन समूह को ठगने गुजरात में जाएं।
वोटर मूर्ख नहीं है भाई जो अब आपकी बात में आए।
उल्टा वोटर नेताओं को ही अबके पूरी तरह से मूर्ख बनाए।
वोटर अब किसी बात से डर कर नहीं रहेगा।
जिसको वह चाहे उसको ही अपना वोट करेगा।
गुजरात में सब नेता अब मतदाता को हाथ जोड़ रहे हैं।
सब दल आ आ कर उसकी नब्ज़ टटोल रहे हैं।
मतदाता ने भी भारत के संविधान की घुट्टी पी रखी है।
परिमल देश को मार्गदर्शन करने की उसने भी कसम खा रखी है।।
नंदकिशोर परिमल, गांव व डा. गुलेर
तह. देहरा, जिला. कांगड़ा (हि_प्र)
पिन. 176033, संपर्क. 9418187358

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