कभी याद कर लो/हेमन्त पांडेय

कभी याद कर लो हमे जिन्दगी सुनसान लगती है
है जिंदगी रोशनी में फिर भी अंधेरों की गुलाम लगती है |

न चाहत है हमे नदियों और समुन्द्र की
हमें तो सिर्फ तेरे संग की प्यास लगती है |

काश उड़ कर आ जा कहीं से तू हवा की तरह
अब तो मेरी जिंदगी के बुझते हुए लव की ,
फिर से जलने की इक तू ही तो आश लगती है |

न पूछना क्या होगा मेरे आ जाने से बस समझ लेना इतना
कि समुन्द्र से मिलने पर नदियों की प्यास बुझती है |

कवि – हेमन्त पांडेय ( अमेठी )
9082747967

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