बातों को जब हम/राम भगत नेगी

बातों को जब हम अनसुनी करें

बातों को जब हम अनसुनी करें
और जब अपनी मनमानी खूब करें

बहुत दूर होते है तब अपनों से
खुद से खुद के सपनों से

क्या ले कर जाना
क्या ले कर हम आये

सब यहीं मिला
दुख सुख का सील सिला

क्या धर्म क्या अधर्म
जानो तो सब ना जानो तो बेशर्म

सबने दिया यहाँ
हिसाब बारी बारी से

कोई सामने से आया
कोई चोरी से आया

मान मर्यादा की किस को फिकर
बिना मतलब का क्यू करें हम जिक्र

कोई जागता है यहाँ
कोई जाग कर भी सो रहा है

जीवन की डफली बज रही है
राम भगत तू बजाता जा बजाता जा

बातों को जब हम अनसुनी करें
बहुत दूर होते है अपनों से
राम भगत किन्नौर
98168-32143

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