कसे तंज जिसने कवि पर, उसके लिये ललकार है।
बैठ महफिल में क्या कविता कहना करता स्वीकार है।।

बात उसकी होगी विषय भी उसका ही होगा,
सुन ले कान खोल कर कैसा कविता चमत्कार है।।

जिनके पास शब्द नहीं वोह करते हैं गाली गलोच।
ऐसे नीच बन सकते नहीं कभी भी माँ के लाल हैं।।

कवि संवेदनशील वेशक होते , रखते कलम तेजधार हैं,
बहुतों की जीह्वा लड़खडाती ,करते ज्युँ ही पलटवार हैं।।

चलो छोड़ो किसके लिये लिखे दिये यह विचार हैं।
वोह क्या पढ़ेगा कविता को ,मन जिसके अंधकार है।।