याद आते हैं/संजीव सुधांशु

गजल
याद आते हैं उनके साथ गुजारे वो दिन,
उनके हुस्न औ’ मेरे इश्क़ के प्यारे वो दिन |
बारिश में भीगना, गलियों में खेलना झगड़ना,
दौलत शौहरत की जुस्तजू नहीं थे न्यारे वो दिन |
मय थी मीना भी और छलकते पैमाने भी थे,
वजमे यार भी थी, थे सिर्फ हमारे वो दिन |
वक्त के चलते शमा की रौशनाई खत्म हुई,
परवानों का तांता लगा रहता थे तुम्हारे वो दिन |
गमों का तुफां आंखों से बहने लगा है अब,
गम भुला तुम्हारी बाहों में हसीं थे सारे वो दिन |
अब तो सुधांशु खाब में आने की इजाजत भी नहीं,
सिर्फ हमारे सहारे थे उन्होने गुजारे वो दिन |
संजीव कुमार सुधांशु
गांव व डाकघर च्वाई
त. आनी जिला कुल्लू
70188-33244

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