तुमने रौशनी मांगी/पंडित अनिल

फासला

तुमने रौशनी मांगी , खुद को जला दिया मैने ।
दोस्ती ऐसे निभायी , क्या बुरा किया मैंने ।।

जो भी मिला मुक़द्दर से , शिक़वा नहीं किया ।
भूले से भी किसी को , नहीं दग़ा दिया मैंने ।।

दर – दरीचा – ए हरदम ,खुला रहा अपना ।
ज़ुबाँ शीरी , जिग़र ,नहीं छूरा किया मैंने ।।

बड़े अदबो – एहतराम से मिला सबसे ।
दिल अपना ही चाक – ए- दरदरा किया मैंने ।।

देर ही सही , परख़ जब अाया अनिल ।
हर सँपोलों से , फ़िर,फ़ासला किया मैंने ।।

पं अनिल
अहमदनगर महाराष्ट्र
८९६८३६१२११

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *