काँच भी कोहिनूर/पंडित अनिल 

काँच भी कोहिनूर बना दिया तुमने ।
क्या हो नहीं सक्ता बता दिया तुमने।।

हवायें भी यूँ कर देती हैं हिफाजत ।
तूफ़ान में भी दिया जला दिया तुमने।।

हौसले को तुम्हारे हर बार है सजदा ।
हासिल हौसले से दिखा दिया तुमने।।

उड़ान इतना भी मुश्किल तो नहीं।
चलो दीद से पर्दा हटा दिया तुमने।।

कोसने से मिटा नहीं है अँधेरा अनिल ।
देहरी पे इक लो सजा दिया तुमने।।

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