मिला नज़र से नज़र/लक्ष्मण दावानी

मिला नज़र से नज़र लाजवाब कर डाला
नज़र ने आपकी , चेहरा गुलाब कर डाला

बड़े अदब से किया क़त्ल इश्क का तुमने
जलाके दिल मेरा सारा हिसाब कर डाला

है बुत परस्त मूरत पूजता रहा तेरी
झुकाके अपने नज़रको हिजाब कर डाला

वफ़ा निभा न सके मोहब्बत में अपनी वो
गिरा के नज़रो में सबके ख़राब कर डाला

लिखा वजूद मेरा अपने हाथ से उसने
न पढ़ सके कोई ऐसी किताब कर डाला

दबी हुई थी शरर आँखों में मुहब्बत की
चुरा के नज़रे उसे आफ़ताब कर डाला
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
19/5/2017
शरार – चिंगारी
आई – 11 पंचशील नगर
नर्मदा रोड़ ( जबलपुर म,प्र, )

6 comments

    1. नावाजिशो का तहेदिल से शुक्रिया आदरणीय बहुत आभार 🙏🙏

    1. नावाजिशो का तहेदिल से शुक्रिया आदरणीय बहुत आभार 🙏🙏

    1. नावाजिशो का तहेदिल से शुक्रिया आदरणीय बहुत आभार 🙏🙏

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