दर्द दिल में मेरे अब होता नहीं
रह के तन्हा दिल कभी रोता नहीं

है खबर सब बोलते है झूठ पे झूठ
साथ कोई सच का अब देता नहीं

रहमते मुझपे खुदा की है बहुत
काम कोई भी मिरा रुकता नहीं

ज़िन्दगी तो खूब सूरत है मगर
कोई भी इसको यहाँ समझा नहीं

चाहते सबकी है जीने की यहाँ
दिल से कोई भी मगर जीता नहीं

पीने को पी जाऊँ ख़ुशी से जहर
कोई दीगर हाथ से पीता नहीं
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
आई – 11 पंचशील नगर
नर्मदा रोड़ ( जबलपुर म,प्र, )
26/10/2016