करो मतदान बढ़ाओ लोकतंत्र की शान/ Ashish Behal

जागरूक मतदाता ,भारत का भाग्य विधाता

अक्सर लोग पूछते हैं कि वोट देकर मुझे क्या मिलेगा मैं वोट क्यों दूं? जबकि असल में जागरूक मतदाता भारत का भाग्य विधाता वो है, जो ये पूछे कि मेरे एक वोट से समाज को क्या मिलेगा? यकीन मानिए हम उसी दिन अपने मत की असली कीमत समझ पाएंगे जब हम समाजहित को मतदान के साथ जोड़ेंगे। अब्राहम लिंकन जी ने बहुत खूबसूरत बात कही थी कि “बैलेट, बुलेट से ज्यादा ताकतवर है”। “ballot is more powerful than bullet” इसी सिद्धान्त पर लोकतंत्र भी जिंदा रहता है। आने वाले 9 नवंबर को हिमाचल प्रदेश भी मतदान द्वारा अपना भविष्य लिखेगा इसलिए ये आवश्यक हो जाता है कि लोग मतदान के प्रति जागरूक हों। भारत के संविधान में सबसे मजबूत अधिकार अगर कुछ मिला है तो वो है “मत का अधिकार”। मतदान की अहमियत समझना और समझाना दोनों ही आवश्यक है। ऐसा देखा गया है कि सामन्यतः लोग मतदान की तरफ अधिक रुचि नही दिखाते और यही कारण है कि लोकतंत्र में शत प्रतिशत मतदान नही हो पाता। 

(Photo :- DC Chamba fb page)

सबसे पहले इस बात पर विचार करना आवश्यक है कि मतदान से क्या हासिल होगा। मतदान लोकतंत्र की संजीवनी है मतदान के बिना लोकतंत्र मृतप्रायः होगा। लोकतंत्र की सबसे सटीक परिभाषा 

अमेरिका के प्रथम राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के इन शब्दों में मिलती है कि “लोगो का, लोगो के द्वारा , लोगो के लिए शासन”।


Photo:- DC Chamba start campaign for matdata jagrukta

 इससे पूरी तरह से साफ होता है कि मतदान के द्वारा हम खुद के लिए शासक चुनते हैं जो हमारे द्वारा और हमारे ही बीच का व्यक्ति होता है। और यही लोकतंत्र की खूबसूरती है यंहा हर किसी को मौका मिलता है आगे आने का शासन करने का। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है हमारा देश का लोकतंत्र कई देशों के लिए पहेली है वो आज तक इस बात को समझ नही पाए कि इतनी विषमताओं चाहे वो भौगोलिक हो, सांस्कृतिक या भाषायी होने के बावजूद भारत लोकशाही इतनी मजबूत और अटूट कैसे है? भारत लोकतंत्र की कामयाबी की एक मिसाल है और इसका श्रेय हमारे देश के महान विचारकों, संविधान निर्माताओं को जाता है जिन्होंने मताधिकार के द्वारा लोगो के हाथों में एक ऐसा औज़ार दिया जिससे भारत का मतदाता भारत के लोकतंत्र को सही रूप देता है। भारत के लोकतंत्र में ही ये उदाहरण मिलते हैं जंहा एक गरीब किसान के बेटे से लेकर, गरीब चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री बन सकता है। एक अखबार बेचने वाला राष्ट्रपति बन सकता है। सिर्फ और सिर्फ इसलिए क्योंकि हमें मत के द्वारा अपना नेता चुनने का अधिकार मिला है। भारत मे मतदान को एक पर्व की तरह मनाया जाता है लोगों को अधिक से अधिक मतदान के लिए प्रेरित किया जाता है क्योंकि मतदान के बल पर ही लोकतंत्र की खूबसूरती बरकरार रह पाएगी। आने वाले 9 नवंबर को हिमाचल अपने लोकतंत्र की एक ओर इवारत लिखेगा। हर राज्य के लोग अपने लिए 2 सरकारे चुनते हैं एक संघीय राज्य के तौर पर केंद्र में और एक राज्य स्तर पर। हिमाचल प्रदेश में पहले विधान सभा चुनाव 1951-52 में हुए थे। और ये हिमाचल के लिए फक्र की बात है कि देश के पहले वोटर के रूप में “मास्टर श्याम सरन नेगी जी ” हिमाचल से सम्बंधित है और भारत निर्वाचन आयोग के ब्रांड अंबेसडर हैं जो लोगो को मतदान के लिए जागरूक करते हुए देखे जाते हैं। 

इस पहाड़ी राज्य में लोग जागरूक हैं परंतु ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्र अधिक होने के कारण कई बातों के प्रचार और प्रसार में दिक्कत आती है। हिमाचल प्रदेश भारत के सम्पन्न राज्यों की श्रेणी में आता है। हिमाचल के मतदाता को आज प्रदेश की उन्नति के लिए मतदान करने आगे आना होगा। हिमाचल की कुछ विशेष आवश्यकताएं है जैसे इस पहाड़ी राज्य को आदर्श पहाड़ी राज्य में कैसे बदल जाए? हिमाचल को हमेशा से ही पर्यटन राज्य के रूप में देखा और पेश किया जाता है हर नेता या मंत्री चाहे किसी भी दल का हो अपने भाषण में हिमाचल के पर्यटन के प्रचार और प्रसार की बड़ी बड़ी बातें करते हैं परंतु आज भी हिमाचल की पर्यटन की दृष्टि से कोई बहुत बड़ी उपलब्धि हाथ नही लगी इसलिए जागरूक मतदाता को इसलिए भी मतदान करना होगा कि हिमाचल में पर्यटन का विकास कैसे हो ? हिमाचल गांव में वसा राज्य है इसलिए गांव स्वावलंबी कैसे बने?
हिमाचल में बढ़ती बेरोजगारी भी एक आम समस्या बनती जा रही है । यंहा शिक्षा की बेहतर सुविधायें हैं जी हां इसमे कोई दो राय नही की हिमाचल शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में खड़ा है और हम अपने पढ़े लिखे युवाओं को उनकी काबलियत के अनुसार रोजगार उपलब्ध नही करवा पा रहे। हिमाचल में आई टी कम्पनी या औद्योगिक क्षेत्र बहुत कम है। जिसके कारण यंहा का पढा लिखा और हुनरमंद युवा बाहरी राज्यों को पलायन कर रहा है जो हिमाचल के लिए एक चिंता का विषय है। 

हिमाचल में इस बार 50,25,000 के करीब मतदाता पंजीकृत है जिनमे 25,31,000 के करीब पुरुष मतदाता और 24,57,000 के करीब महिला मतदाता चुनावों में मतदान करने के लिए पंजीकृत हुए हैं। हिमाचल के युवा इस बार हिमाचल के चुनावों में अहम भूमिका निभाएंगे। इस बार 1,12,000 के करीब नए युवा मतदाता हिमाचल के भाग्य विधाता बनेंगे। 

Source:- internet

युवा मतदाताओं 18 से 40 वर्ष तक के युवाओं की संख्या इस बार 51 प्रतिशत के करीब है। हिमाचल में पिछले 2 विधानसभा चुनावों में लगभग 70-74 प्रतिशत के करीब मतदान हुआ है। इस बार ये आंकड़ा बढ़ सकता है और ये लोकतंत्र के लिए आवश्यक है। हम सबका ये दायित्व है कि अधिक से अधिक लोगो को मतदान के लिए प्रेरित करें लोगो मे मतदान के प्रति कोई उदासीनता है तो उसे दूर करने में मदद करें। भारतीय निर्वाचन आयोग के द्वारा भी मतदाता को जागरूक करने के लिए कई अभियान चलाए जा रहे हैं। गांव गांव में ओर हर जगह मतदाता जागरूक अभियान चल रहे हैं नुकड़ नाटकों और कई प्रकार के कार्यक्रम द्वारा मतदाताओं को मत का मोल बताया जा रहा है।

Photo source by DC Chamba official fb page.

Honourable D C Chamba is playing wonderful role for voter awareness “matadata jagrukta”

 हम मत का सही प्रयोग करके अपने समाज के लिए और क्षेत्र की दिशा और दशा निर्धारित करते हैं इसलिए मत का प्रयोग सोच समझ कर करना अति आवश्यक है। क्योंकि हम 5 साल के लिए एक नेता या सरकार ही नही चुनते बल्कि आने वाले 5 सालों के लिए विकास को भी चुनते हैं। हम वोट किसे दें ये हमारा निजी मामला हो सकता है परंतु हम वोट अवश्य दें क्योंकि ये देश का मामला है। इसलिए इस अहम बात को ध्यान में रख कर अपने आस पास के मतदाताओं को जागरूक करें और अपने मित्रों के साथ मिलकर मतदान करें। अंत मे पहाड़ी भाषा मे ये 4 लाइनें

“चला मित्रो वोट असां सारियां पाणा,
मिली ने असां ए फर्ज निभाणा,
छुटीया अगर इक भी मतदाता
ता समझा टुटिया लोकतन्त्रे ने असां दा नाता।


✍🏻✍🏻 आशीष बहल”

अध्यापक
चुवाड़ी जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश।
Ph 9882600455

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