मै और तुम/सुरेश भारद्वाज निराश

मै और तुम

हमने चाहा था जीना तुम्हारे लिये,
रास आया न जीना कि मौत आ गयी।

इतनी गहरी थी खामोशी हम क्या कहै
डूब जाने से पहले ही मौत आ गयी।

जख्म गहरे थे इतने कि नासूर हो गये
इनके रिसने से पहले ही मौत आ गयी।

भूल जाना तुम्हें मेरे वस मे न था
याद करने से पहले ही मौत आ गयी।

हमने चाहा था कर लें हम पूजा तेरी
दीप जलने से पहले ही मौत आ गयी।

हंस लेते तेरे संग यूं हम जो कभी
मुस्कराने से पहले ही मौत आ गयी।

इस कद्र हमें मारा बेरुखी ने तेरी
तुझे चाहने से पहले ही मौत आ गयी।

गले लग कर तेरे रोया था मैं बहुत
सम्भलने से पहले ही मौत आ गयी।

निराश एसा जीना भी क्या जीना है
इस जीने से पहले ही मौत आ गयी।

सुरेश भारद्वाज निराश:evil:
धौलाधार कलोनी लोअर बड़ोल
पी.ओ. दाड़ी -धर्मशाला हि.प्र.
176057
मो० 9418823654
9805385225मै औ’ तुम

हमने चाहा था जीना तुम्हारे लिये,
रास आया न जीना कि मौत आ गयी।

इतनी गहरी थी खामोशी हम क्या कहै
डूब जाने से पहले ही मौत आ गयी।

जख्म गहरे थे इतने कि नासूर हो गये
इनके रिसने से पहले ही मौत आ गयी।

भूल जाना तुम्हें मेरे वस मे न था
याद करने से पहले ही मौत आ गयी।

हमने चाहा था कर लें हम पूजा तेरी
दीप जलने से पहले ही मौत आ गयी।

हंस लेते तेरे संग यूं हम जो कभी
मुस्कराने से पहले ही मौत आ गयी।

इस कद्र हमें मारा बेरुखी ने तेरी
तुझे चाहने से पहले ही मौत आ गयी।

गले लग कर तेरे रोया था मैं बहुत
सम्भलने से पहले ही मौत आ गयी।

निराश एसा जीना भी क्या जीना है
इस जीने से पहले ही मौत आ गयी।

सुरेश भारद्वाज निराश:evil:
धौलाधार कलोनी लोअर बड़ोल
पी.ओ. दाड़ी -धर्मशाला हि.प्र.
176057
मो० 9418823654
9805385225

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