बचा लेते हैं/पंडित अनिल

🙏🏻बचा लेते हैं🙏🏻

हम अदब से नज़रें झुका लेते हैं ।
हर रिश्ता ऐसे ही बचा लेते हैं ।।

दो जहाँ का मालिक,वो है सबका।
लोग फ़िर भी यतीम बता देते हैं।।

छोड़िये,अजी गुमान है किस बात का ।
सयाने आँख से काजल चुरा लेते हैं।।

अपना सा तो लगता हैं हर आदमी ।
अपनेपन में घुल कर दग़ा देते है ।।

अमन चैन दूजे का पचता ही नहीं ।
सयाने सुक़ून-ए घर आग लगा देते हैं।।

बहुत है,क्या-क्या बयाँ करे अनिल।
लोग दिखा मरहम नमक लगा देते हैं।।

पं अनिल
अहमदनगर महाराष्ट्र
📞8968361211
स्वरचित अप्रकाशित

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