दिल की भाषा/राम भगत नेगी

दिल की भाषा…..

दिल की भाषा कोई समझ लेते
आज बोडर में सेनिक ना होते

कौन अपना कौन पराया समझ लेते
आज दिल को धड़कना ना पड़ता

रोज़ जीत रहे है रोज़ हार रहे है
हम सब अपने आप से

जिंदगी किस की कितनी है समझ लेते
तो आज जिंदगी के लिये लड़ते नहीं

एक एक कर हम हँस रहे है रो रहे है
आँसुओं को रोज़ छुपा रहे है निकाल रहे है

आँसुओं की कीमत कोई जान लेते
तो यू बद आवाज़ हम आज ना होते

अपने आप का होंसला ही उम्मीद है
बस इसी उम्मीद मैं राम भगत अब तक जीता है

दिल की भाषा कोई समझ लेते
आज बोडर में सेनिक ना होते

राम भगत

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