अब क्या जवाब दूँ में तेरे इस सवाल पर
दिल हार बैठे है तेरे हुस्ने जमाल पर

कुछ इस कदर सुलग उठी चिंगारी जिस्म में
पूरा लहू है जिस्म का मेरे उबाल पर

तुम से जुड़े खयाल में जीते है इन दिनों
कुछ खा तरस कभी तुम भी मेरे हाल पर

तुमको मिले उजाले यही दिल में चाह थी
हर सूँ बहारें छाये जीवन के विसाल पर

इक अर्से से तरस रहे है दीद को तेरे
अब मत गिराओ जल्फो को अपने गाल पर

पीछे पड़ा है जान के सारा जहाँ मेरी
ये जाँ ले लेंगे इश्क की तेरे मिसाल पर
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
8/6/2017
आई – 11 पंचशील नगर
नर्मदा रोड़ ( जबलपुर म,प्र, )