प्रेम जैसा ना कोई अस्त्र/रितु सिंह रितु

प्रेम जैसा ना कोई अस्त्र
प्रेम से बड़ा ना कोई शस्त्र
प्रेम ने जीते हैं कितने युद्ध
प्रेम से होती है आत्मा शुद्ध
प्रेम से बड़ी न कोई शक्ति
इसीलिये प्रेम का बखान
करती है प्रकृति
प्रेम में है चमत्कार
प्रेम है अनमोल उपहार
प्यार बिन है सब बेकार
प्यार बिन है जीवन बेजार
प्रेम होता है सच्चा जहाँ
ईश्वर रहता है वहाँ
प्रेम ईश्वर का वरदान है
इस से होती मनुष्यता
की पहचान है
प्रेम के हर पल में है जीवन
प्रेम से खिलते है होंठ
प्रेम से आँखे होती है नम
प्रेम तो है अमर
प्रेम व्याप्त है सर्वत्र
प्रेम न छुपता किसी से
प्रेम न डरता किसी से
प्रेम तो रहता है दिल में
हर किसी के
प्रेम की शक्ति बड़ी है
नफरत से
प्रेम तो कोमल हृदय की
पहचान है
ये पवित्र हृदय की पवित्रता
का स्वाभिमान है
ना जाने कितने दिल
मिले हैं प्यार से
न जाने कितने हृदय मुक्त हुए हैं
नफरत और अत्याचार से
प्रेम तो है ईश्वर की
मनुष्य पर कृपा
प्रेम ने की है मनुष्य की
हर बुराई से रक्षा सदा
प्रेम रहता है हृदय में
ये दिखता है
नैनों से बहते झरनों में
प्यार है आँखो की गहराई में
किसी की याद में
तन्हाई में
किसी की मुस्कुराहट में
किसी की सादगी में
जो न देखी कभी
उस मौसम की ताजगी में
अचानक सुंदर लगने लगे
संसार में
किसी की बातों में
किसी के इंतजार में
सदियों से प्रेम ने पुलकित किया
ये जहाँ
प्रेम में आँखे होती है
दिल की जुबां
श्रष्टि के इस अनोखे चमत्कार ने
ईश्वर के अनमोल उपहार ने
इस संसार को जीवन दिया
ये ना किसी को ज्यादा
और ना किसी को कम दिया
प्यार तो है एहसास
प्यार का तो है अपना
अलग अंदाज
ये विछड़ो को मिला देता है
जहाँ जाए वहाँ खुशियाँ देता है
प्यार की है अपनी अदा
सच्ची है इसमें कसमें
सच्ची है वफ़ा
सच्चे प्यार में कोई धोखा नहीं
सच्चे प्यार को पाकर कोई कभी खोता नहीं
प्रेम तो है अमृत
है मेरी यही प्रार्थना
न हो कभी ये हृदय से विस्मृत
बिन प्रेम के हृदय हो जाता है कठोर
करता है मनुष्य अपराध घोर
पर प्रेम तो है अटूट डोर
टूटने पर देती है चोट
प्रेम की ये डोर सदा के लिए
जड़ हो जाये
प्रेम हर धड़कन में समाए
हर सुबह प्रेम को ताजगी दे
और शाम इसे रंगीन बनाये
हर चहचाहट प्रेम के गीत सुनाये
मेरे ये शब्द अमर हो जाये

One comment

  1. अद्भुत और बेजोड़ कविता।

    सुंदर रचना हेतु बधाई आपको।

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