💏आँखें💏

जब जब चाहा तुम्हें देखना
तब तब मेरी सोईं आँखें।
जब जब मैंने तुम्हें पुकारा
तब तब मेरी रोईं आँखें।
जब जब तूने आँख मिलाई
तब तब तुझमें खोईं आँखें।
जब जब तूनें मुझे चेताया
तब तब मैंने धोईं आँखें।
जब जब मैंने झूठ पुकारा
तब तब मैंने लकोईं आ्ँँखें।
जब जब तूने जख्म दिया
दर्द संग मैने ढोईं आँखें।
जब जब तेरी याद सताए
तब तब मैंने भिगोई आँखें
जब जब मैं बिलकुल टूटा
नज़र आईं मुझे वोही आँखें।

*सुरेश भारद्वाज निराश*
धौलाधार कलोनी लोअर बड़ोल पीओ दाड़ी (धर्मशाला)
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