घाट घाट हर हाट/जग्गू नोरिया

घाट घाट हर हाट जनता करे यह सवाल,
क्युँ हो रहा वोट माँगते नेताओं का बुरा हाल।।

चारों तरफ शिक्षा हब, बसों का बड़ा जाल,
आमजन खुश नहीं , बड़ा पचीदा यह सवाल।।

जो बनाना है बच्चा ,बना लो तुम घर द्वार,
सोच अव्वल नेता की , शिक्षा से होगा सुधार।।

ओ बी सी हल्का होते नहीं मैदान में उम्मीदवार,
संदेश सीधा यहाँ नहीं होता जाति विशेष प्रचार।।

सब कुछ ठीक नहीं फिर भी यहाँ अब की बार,
गुरू शिष्य आमने सामने लिये खडग बिन ढाल।।

सच में रण होगा या चलेगा मामा कोई सकुनि चाल,
जनता तो मजे लेगी, जो जीता बही होगा सरताज।।

लेकिन बातों बातों में देखिये दब गया कैसे सवाल,
किसी ने आवाज नहीं दी, बन्दरों डंगरों के खिलॉफ।।

यह मिलीभगती या समझौता हुआ है कहीं पर खास,
बन्दर खुश हैं चलेगी नहीं बन्दुक कहती है सरकार।।

फसल उझाडेंगे बन्दर , आवारा डन्गर करेंगे सर्वनाश,
दफ्तर में बैठे नौकरशाह ,जनता होगी पल पल ह्रास।।

आदी हो गयी है जनता इन सब की ,जुर्म सहती वेहिसाव,
किसके हिस्से जीत का सैहरा , पढ़ सको पढलो किताव।।

सवालों में सवाल निकले ,दब गयी जनता की आवाज,
खून गरीब का पानी हुआ,कमर झुकी खड़ा द्वार।।

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